दादी जी थारो झुंझनू दरबार

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॥ पावन पाठ ॥

दादी जी थारो झुंझनू दरबार,

भगतो की आह हर गम गूंजे थारी जय जय कार,

दादी जी थारो झुंझनू दरबार,

बड़े बड़े यहाँ सेठ है आते,

हाथ जोड़ तेरे शीश झुकाते,

अप्रम पार तेरी माया है हर कोई करे पुकार,

दादी जी थारो झुंझनू दरबार,

जो भी तेरे दर पे आया,

कर दी है अंचल की छाया,

आशीर्वाद जिसे मिल जाता खुश रहे घर बार,

दादी जी थारो झुंझनू दरबार,

सुनील शर्मा धींगड़ीयाँ रट ता तेरे नाम की माला जपता,

दीनश शेखावत सब को कहता करती नैया पार,

दादी जी थारो झुंझनू दरबार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।