मेरे बाबा की खाटू नगरी है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जाने कितनो की किस्मत यहाँ आके सवरी है,

तिहु लोक में तो कोई और नहीं मेरे बाबा की खाटू नगरी है,

जब से मैं खाटू जाने लगा,

बदली है मेरी ये ज़िंदगी,

बाबा ने अपनी शरण ले लिया,

चरणों की मुझको मिली बंदगी,

उल्जन हो चाहे जैसी यहाँ आके सुलजी है,

तिहु लोक में तो कोई और नहीं मेरे बाबा की खाटू नगरी है,

खाटू की भूमि पावन बड़ी करती है सारी श्रिस्टी नमन,

बाबा का दर्शन पाने से पावन हो जाता तन और मन,

कुछ बात है खाटू जी में सारी दुनिया उमड़ी है,

तिहु लोक में तो कोई और नहीं मेरे बाबा की खाटू नगरी है,

पग पग पे जिसके दुश्मन खड़े,

जिसका सहारा कोई नहीं बेबस वेह्चारे मजबूर वो,

उनकी लड़ाई बाबा लड़े,

मोहित भगतो की भगियां यहाँ खुशियों से निखरी है,

तिहु लोक में तो कोई और नहीं मेरे बाबा की खाटू नगरी है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।