नवा साल पौणाहारी ना मनावागे

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॥ पावन पाठ ॥

भागा वाला दिन होना भागा वाली रात वि,

भगता दी होनी नाथ न मुलाकात भी ,

डयोट सिद्ध गुफा वाली पहली पौड़ी उते आपा नच के धमाला पावागे,

नवा साल पौणाहारी ना मनावागे,

दीवे वे जगाने आपा जागो भी है कडनी,

नाथ खुश होजे ओहने कमी नहीं छड़नी,

सिद्ध सेवा मंडल अम्बाले वाले भगता नाल लंगर भंडारे बर्ताव गे,

नवा साल पौणाहारी ना मनावागे.......

कर्मा दे नाल दिन भागा वाला आमदा,

पौणाहारी भगता नु दर ते भुलाम दा,

भंड दा मुरादा जोगी भगता नु मिठिया,

भर भर झोलियाँ ले जावा गये,

नवा साल पौणाहारी ना मनावागे

गुफा विच बैठा सारी दुनिया नु तक दा,

ख़ुशी बरसौंदा रेह्न्दा खिड़ खिड़ हसदा,

खोलके खजाने दिंदा भगता नु नाथ मेरा,

विक्की वांगु आपा तर जावा गये,

नवा साल पौणाहारी ना मनावागे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।