दूल्हा बन के चले है भोले बाबा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

दूल्हा बन के चले है भोले बाबा,

देखो जी शिव रात आ गई,

चलो गोरा को देने वधाई शिव की बरात आ गई,

छम छम नाच रही जोगियां भूत प्रीत उछले है डायनियाँ,

ढोल ताशे भजे है नगाड़ा ओ शिव की बारात आ गई,

दूल्हा बन के चले है भोले बाबा,

संग भूतो चड़ैलों की टोलियां,

भोले हर हर और बम बम की बोलिया,

कैसा भूतो ने मेकअप लगा लिया सारी नगरी को आकर डरा दियां,

भोला भस्मी लगा कर चला रे देखो जी शिव रात आ गई,

दूल्हा बन के चले है भोले बाबा

अरे गोरा की मैया क्या सोह रही,

सारी नगरी में चर्चा ये हो रही,

गोरा रानी को कैसा वर भा गया

द्वारे चल कर मदारी कोई आ गया,

देखे राजा हिमाचल विचारे,शिव की बरात आ गई,

दूल्हा बन के चले है भोले बाबा

पर भोले की माया तो निराली है,

सारे दुनिया खड़ी बन सवाली है,

इनकी माया को गोरा ही जाने है,

शिव क्या है वही पहचाने है,

काम करता जगत के ये सारे देखो शिव रात आ गई

दूल्हा बन के चले है भोले बाबा

गोरा मैया जी दुल्हन है बन गई,

सारी सखियों से सूंदर है लग रही,

गोरा मैया के मेहँदी रंग लाइ है,

सारी दुनिया से न्यारा वर पाई है,

चाँद सूरज भी नजरे उतारे देखो जी शिव रात आ गई,

दूल्हा बन के चले है भोले बाबा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।