कलयुग में एक बार कन्हैया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कलयुग में एक बार कन्हैया ग्वाले बन कर आओ रे,

आज पुकार करे तेरी गइयाँ आके कंठ लगाओ रे,

कलयुग में एक बार कन्हैया

जिसको मैंने दूध पिलाया वोही आज सताते है,

चीर फाड़ कर मेरे बेटे मेरा मॉस विकाते है,

अपनों की अभिशाप से मुझको आके आज बचाओ रे,

कलयुग में एक बार कन्हैया......

काहे हम को मुर्ख बनाया घुट घुट कर यु मरते है,

उसपर दिये न तूने अपनी रक्षा करने को,

भटक गये एह मेरे बालक रस्ता आज दिखाओ रे,

कलयुग में एक बार कन्हैया.....

एक तरफ तो मेरे बछड़े अन धन को उपजाते है,

उसी अन को खाने वाले मेरा वध करवाते है,

हरष जरा तुमआके वध पे आके रोक लगाओ रे,

कलयुग में एक बार कन्हैया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।