मन मस्त हुआ फिर

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॥ पावन पाठ ॥

मन मस्त हुआ फिर क्या बोले,

क्या बोले फिर क्योँ बोले,

हीरा पाया बांध गठरिया,

हे बार बार वाको क्यों खोले,

मन मस्त हुआ फिर ......

हंसा नावे मानसरोवर,

हे ताल तलैया में क्यों नावे ,

मन मस्त हुआ फिर .......

हलकी थी जब चढ़ी तराजू,

हे पूरी भई तब क्या तोलै,

मन मस्त हुआ फिर ......

सूरत नाना में भी मत वाली,

मनवा पी गई अल बोले,

मन मस्त हुआ फिर ......

कहै कबीर सुनो भाई साधो,

हे साहिब मिल गा सबुरी में,

मन मस्त हुआ फिर ......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।