घडी घडी भांग न पिसाओ भोला जी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

घडी घडी भांग न पिसाओ भोला जी,

कभी रोटी सोटी भी खाओ भोला जी,

गोरा रानी ऐसे न आराम करो जी,

हो जाओ गई मोटी थोड़ा काम करो जी,

मेरी चिंता छोड़ दो भोले फिटनेस सेण्टर जाऊ गी,

कसरत वस्रत करके मैं तो फिर से स्लिम हो जाऊ गी,

गोरा रानी पहाड़ो पर ये सुविदा कहा से पाओ गी,

लाइट भी नहीं मिलती यहाँ पे सेण्टर कहा से जाओ गी,

छोड़ो सारी बात ना पकाओ भोला जी.,

मुझसे न भांग पीस वाओ भोला जी,

भांग से अगर तकलीफ है तो फिर इक दो चिलम भरो रानी,

लाके धतूरा खिला दो मुझको कुछ तो पुण्य करो रानी,

तुम हो गंजेड़ी तुम हो भंगेडी साथ नहीं रह पाउ गी,

छोड़ दो सारी लत शिव जी वर्ण मायके चली जाऊ गी,

ऐसे मुझ को न बदनाम करो जी,

हो जाओ गई मोटी थोड़ा काम करो जी,

कार्तिक और गणेश की सोचो कही बिगड़ न जाए वो,

देख देख के कही गलत आदात में न पड़ जाए वो,

छोड़ के सारे परपंच जरा तुम सेल फ़ोन मेरा उठाओ जी,

जा रूपम रजनीश को अयोद्या धाम से भूल वाओ जी,

ऐसे नहीं रायता फेलाओ भोला जी ,

कभी रोटी सोटी भी खाओ भोला जी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।