दुखा देया मारेया मुशीबता देया मारेया

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

दुखा देया मारेया मुशीबता देया मारेया बाबा जी दी गुफा वल जा,

तू भगता जाके रोट बाबे दे चढ़ा,

दुःख कटे जान गे कलेश मूक जान गे धुनें दी भभूति मथे ला,

तू भगता बाबा जी दी गुफा वल जा,

तू भगता जाके रोट बाबे दे चढ़ा,

बाबा जी नु चौहन वाले कदे भी नहीं डोल दे,

तू क्यों रहा गबरा,

तू भगता बाबा जी दी गुफा वल जा,

तू भगता जाके रोट बाबे दे चढ़ा,

श्रद्धा प्रेम जिथे हॉवे विश्वाश जी,

पुता दियां खैरा दिंदा पा,

तू भगता बाबा जी दी गुफा वल जा,

तू भगता जाके रोट बाबे दे चढ़ा,

छोटा जेहा बालक सुनहरी जटा वाला जोगी,

सुखी रूखी फल दिंदा ला,

तू भगता बाबा जी दी गुफा वल जा,

तू भगता जाके रोट बाबे दे चढ़ा,

तारे गये जिह्ना ने आसा बाबा जी ते रखिया,

सोनी पटी वाला रहा गा,

तू भगता बाबा जी दी गुफा वल जा,

तू भगता जाके रोट बाबे दे चढ़ा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।