वे आजा सिद्ध जोगियां आ भगता दे वेहड़े

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॥ पावन पाठ ॥

शाहतालियां मेला लगाया नच्दे भगत प्यारे,

गुफा सजाई नाल फुला दे दर्शन करलो सारे,

था ठिकाना कोई न छडया न नकर न खेड़े,

वे आजा सिद्ध जोगियां आ भगता दे वेहड़े,

वे आजा पौनहारियाँ कट चौरासी गेडे,

पहले जन्म न कुज मैं जाना इस विच दीद नु तरसा,

अखियां विचो नीर न रुकदा बदली बन बन बरसा,

मोर मैं देखा क्ले घूमदे लाये किथे डेरे,

वे आजा सिद्ध जोगियां आ भगता दे वेहड़े,

लाल जगन में पुछदे नाही कलयुग पाया गेरा,

पुछदी बालक जो गौआँ तारे माँ रत्नो दा केहड़ा,

किथे तेरी लस्सी रोटी घूम दे नाथ बथेरे,

वे आजा सिद्ध जोगियां आ भगता दे वेहड़े,

रोट चढ़ावा मनिया दे माँ बालक पा दे फेरा,

गोल्डी चौके आसा लाइयाँ मुखड़ा तकना तेरा,

चिमटा तेरा वाजा मारे करदे दूर हनेरे,

वे आजा सिद्ध जोगियां आ भगता दे वेहड़े,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।