बेटी की शादी में माँ अम्बे को भुलाना है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

बेटी की शादी में माँ अम्बे को भुलाना है,

हाथ जोड़ दर पे खड़ा माँ अम्बे तुम आना है,

बेटी की शादी में माँ अम्बे को भुलाना है,

तेरी दया से माँ ये खुशियों का दिन आया,

निर्धन के घर तूने धन धान बरसाया,

तेरा शुक्र मैया तेरा गुण गान गाना है,

बेटी की शादी में माँ अम्बे को भुलाना है,

तेरी बदोलत माँ ये मेहँदी की रात आई,

दिया वरदान तूने तब ये बारात आई,

माँ मेरी बेटी का तूने साथ निभाना है,

बेटी की शादी में माँ अम्बे को भुलाना है,

फूलो और चुनरी से मैंने मंडप सजाया है,

उस के सन्मुख माँ तेरा भवन बनाया है,

तुहरे नाम का माँ मैंने जागरण कराना है,

बेटी की शादी में माँ अम्बे को भुलाना है,

तेरे ही भरोसे माँ परिवार सारा है,

मैया अपने बचो का तू ही तो सहारा है,

माँ बेटे का तुमसे हर रिश्ता निभाना है,

बेटी की शादी में माँ अम्बे को भुलाना है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।