शिव सन्यासी से मरघट वासी से

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव सन्यासी से मरघट वासी से,

मैया करू गी मैं तो वियाह,

मैं शिव को ध्याऊगी उन्ही को पाउ गी शिव संग करू गी मैं तो वियाह,

मैना ने समज्या वो है श्मशान का वासी ,

तू महलो की रानी तू कैसे बने गी दासी,

गोरा तू सोच ले कैसे करेगी वियाह,

बाबा हिमाचल देखो सब ऋषियों को ले आये,

सब ने मिल कर देखो फिर गोरा को समजाये,

ओघड है योगी है कैसे होगा निभा,

शिव सन्यासी से मरघट वासी से.......

ना मानी थी गोरा वो तो शिव के ध्यान में लागि,

शिव की याद में सोइ शिव की याद में जागी,

जन्म जन्म का साथ साथ है जन्मो का रिश्ता,

शिव सन्यासी से मरघट वासी से,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।