ऐ वतन ऐ वतन हमको तेरी कसम

मोहम्मद रफ़ी
अन्य भजन देश भक्ति भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

जलते भी गए,

कहते भी गए,

आज़ादी के परवाने,

जीना तो उसी का जीना है

जो मारना वतन पे जाने

ऐ वतन ऐ वतन हमको तेरी कसम

तेरी राहो में जान तक लूटा जायेंगे

फूल क्या चीज़ है

तेरे कदमो में हम भेंट अपने सरो की चढ़ा जायेंगे

कोई पंजाब से, कोई महाराष्ट्र से

कोई UP से है, कोई बंगाल से

तेरी पूजा की थाली में लाए हैं हम

फूल हर रंग के आज हर डाल से

नाम कुछ भी सही, पर लगन एक है

ज्योत से ज्योत दिल की जगा जायेंगे

तेरी जानिब उठी जो कहर की नज़र,

उस नज़र को झुका के ही दम लेंगे हम

तेरी धरती पे है जो कदम गैर का,

उस कदम का निशा तक मिटा देंगे हम

जो भी दीवार आएगी अब सामने,

ठोकरों से उसे हम गिरा जाएंगे

सेह चुके है सितम हम बोहोत गैर के

अब करेंगे हर एक वार का सामना

झुक सकेगा ना अब सरफरोशो का सर

चाहे हो खुनी तलवार का सामना

सर पे बांधे कफ़न हम तो हसते हुए

मौत को भी गले से लगा जायेंगे

ऐ वतन ऐ वतन

फिल्म - शहीद(1965)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।