चलता रहु तेरी और सँवारे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चलता रहु तेरी और सँवारे,

मेरा चलता नहीं कोई जोर सँवारे,

अठरा क्या अठरासो क्या अठरा हज़ार चल लूंगा,

तेरे लिये मैं सांवरिया कुछ भी मैं कर दूंगा,

मैं नाचू गा बन कर के मोर सँवारे,

चलता रहु तेरी और सँवारे,.......

मुझको है मालूम तू बाबा रुकने मुझे न देगा,

अपने सिवा किसी और के आगे झुकने मुझे न देगा,

तेरे पीछे रहा हु मैं दौड़ सँवारे,

चलता रहु तेरी और सँवारे.......

चलते चलते जल्दी से तेरा दर्शन मिल जाये,

दर्शन पाके सांवरियां तेरा कला भवन खिल जाये,

तेरी प्रेमी नहीं है कमजोर सँवारे,

चलता रहु तेरी और सँवारे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।