तू ना रोना की तू है भगत सिंह की माँ

मोहम्मद रफ़ी
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॥ पावन पाठ ॥

तू ना रोना की तू है भगत सिंह की माँ

मरके भी लाल तेरा मरेगा नहीं

घोड़ी चढ़के तो लाते है दुल्हन सभी

हस्के हर कोई फ़ासी चढ़ेगा नहीं

इश्क़ आज़ादी से आशिको ने किया

देख लेना उसे हम ब्याह लाएंगे

ऐ वतन ऐ वतन

हमको तेरी कसम,तेरी राहों में जान तक लूटा जायेंगे

जब शहीदो की अर्थी उठे धूम से

देश वालो तुम आंसू बहाना नहीं

पर मनाओ जब आज़ाद भारत का दिन

उस घड़ी तुम हमे भूल जाना नहीं

लौट कर आ सके ना जहां में तो क्या

याद बन के दिलो में तो आ जायेंगे

ऐ वतन ऐ वतन

हमको तेरी कसम,तेरी राहों में जान तक लूटा जायेंगे

ऐ वतन ऐ वतन

फिल्म - शहीद(1965)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।