सौंप दी मैंने जीवन डोरी साई तेरे हाथ

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॥ पावन पाठ ॥

मेरा मुझमे कुछ रहा अब सब है तेरा नाथ,

सौंप दी मैंने जीवन डोरी साई तेरे हाथ,

जैसे भी नचालो नाथ जीवन डोरी तेरे हाथ,

ढूंढ रहा था अपना पण अपने रिश्ते नातो में,

लेकिन मुझको बहकाया सब ने अपनी बातो में,

उस दुनिया दारी को बाबा समजा हु मैं आज,

सौंप दी मैंने जीवन डोरी साई तेरे हाथ,

जैसे भी नचालो नाथ जीवन डोरी तेरे हाथ,

साई चरण में जब से मेरे मन की लग्न लगी है,

हर प्राणी के मन में सूरत साई जी की दिखी है,

मेरे मन का मैला दर्पण अब हो गया है साफ़,

सौंप दी मैंने जीवन डोरी साई तेरे हाथ,

जैसे भी नचालो नाथ जीवन डोरी तेरे हाथ,

मेरे जीवन की हर उल्जन साई जी हल करते,

हर पल मेरे साई बाबा मेरे संग में चलते,

शर्मा और मोक्ष के मन की पूरी हुई हर बात,

सौंप दी मैंने जीवन डोरी साई तेरे हाथ,

जैसे भी नचालो नाथ जीवन डोरी तेरे हाथ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।