माँ आजा शेरवलिये तनु सोह साढ़े प्यार दी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सारे घाटे पुरे किते लोड है बस दीदार दी,

माँ आजा शेरवलिये तनु सोह साढ़े प्यार दी,

इक दिन सुपने दे विच आई माता शेरावाली,

आंख खुली ता करके महरा तुर गई मेहरवाली,

खुशिया दे नाल झोलियाँ भर गी तुर गी सीने ठार दी,

माँ आजा शेरवलिये तनु सोह साढ़े प्यार दी,

करा माता दी मालिक मैया देखे दुनिया सारी,

दिल करदा हां कॉल तेरे आवा मार उडारी,

तेरे घर विच कोई कमी न लोड है बस इतवार दी,

माँ आजा शेरवलिये तनु सोह साढ़े प्यार दी,

मिंटू हेयर न हेरा दे विच तेरिया रेहन उडीका,

मुकियाँ न तेरा इंतज़ार माँ गिनियाँ बहुत तरीका,

अपने बच्या दे नाल आके गल कर ले इकरार दी,

माँ आजा शेरवलिये तनु सोह साढ़े प्यार दी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।