तुम्बा मेरे साई दा हर हर बोल्दा

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तुम्बा मेरे साई दा हर हर बोल्दा,

दिल वटे दिला दिये एह सांझ नु है खोल्दा,

तुम्बा मेरे साई दा हर हर बोल्दा,

तुम्बा जदो वज्दा ते धुर गला हुंदियाँ,

तेरे मेरे प्यार दियां लोका गलना गुंदियाँ,

जिसदी इनायत साऱी उस नु है टोलदा,

तुम्बा मेरे साई दा हर हर बोल्दा,

तुम्बे नाल जुडी मेरे दिल वाली तार जी,

मैंनू मेरे साई नल हो गया प्यार जी,

साज रूस जान भावे एह साज नहीं ढोलदा,

तुम्बा मेरे साई दा हर हर बोल्दा,

तुम्बा की है कहंदा साबे कोई कोई जांदा,

तुम्बे दियां रम्जा नु विरला पहचान दा,

बाली आखे तुम्बा भेद दिल वाले खोल दा,

तुम्बा मेरे साई दा हर हर बोल्दा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।