भुखियाँ ने अखियाँ माँ तेरे दीदार दिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

भुखियाँ ने अखियाँ माँ तेरे दीदार दिया,

साड़ी वि सुन ले दाती सुने संसार दियां

तुर गइया खुशियां ले आवि माता मोड़ तू,

टूटे होये दिला नु देवी आप हथि जोड़ तू,

लगिया साहनु भी आसा तेरे ने प्यार दियां,

साड़ी वि सुन ले दाती सुने संसार दियां

रेहमता दा खोल द्वारा साढ़े लई आन के,

चरना विच रख ले साहनु नौकर जान के,

कलियाँ मुरझावन न श्रदा दे हार दियां,

साड़ी वि सुन ले दाती सुने संसार दियां

चरना च गंगा तेरे ठा ठा है मारदी,

चली न जांदी शक्ति ठंडी जाहि धार दी,

धारा तेरे चरना दियां भगता नु तार दियां,

साड़ी वि सुन ले दाती सुने संसार दियां

चन है विनती करदा दावे हाथ जोड़ के,

जाई न माई रोंदा बचड़े नु छोड़ के,

कई भरियाँ हज़ारियाँ तेरे दरबार दियां,

साड़ी वि सुन ले दाती सुने संसार दियां

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।