तूने बात किसी की न टाली साई जी

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॥ पावन पाठ ॥

तूने बात किसी की न टाली साई जी,

मैं भी तेरे दर पे आया हु मुझे भीख दे,

मुझको चरणों से न हटना,

अपनी नजरो से न गिराना,

मेरी बगियाँ का तू माली,

तूने बात किसी की न टाली साई जी,

मुझे भीख दे.....

हाथ दया का सिर पे रखदे,

मेरी मुश्किल आसान करदे,

ताने मारे दुनिया सारी,

तूने बात किसी की न टाली साई जी,

मुझे भीख दे.....

फैसला है तेरी इक नजर का,

मैं भी सेवक तेरे दर का,

अब तो विनती सुन ले साई,

तूने बात किसी की न टाली साई जी,

मुझे भीख दे.....

मिल जाए तूफ़ान में किनारा,

हो जाए जो तेरा इशारा,

चंदा रवि हमसर ने पुकारा,

तूने बात किसी की न टाली साई जी,

मुझे भीख दे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।