तेरी मैं दीवानी होइ पौनहारियाँ तेरी मैं दीवानी होइ

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॥ पावन पाठ ॥

तेरी मैं दीवानी होइ पौनहारियाँ तेरी मैं दीवानी होइ,

देख के रूप निराला जोगी दा सुध भुध अपनी खोई,

तेरी मैं दीवानी होइ पौनहारियाँ तेरी मैं दीवानी होइ,

नाम तेरे दी मस्ती चढ़ गई भूल गई खाना पीना,

जेहड़े रंग विच रखे जोगियां उसे रंग विच जीना,

जिथे देखा तू ही दिसदा होर न दिसदा कोई,

तेरी मैं दीवानी होइ पौनहारियाँ तेरी मैं दीवानी होइ,

हाथ विच चिमटा मोड़े झोली पैरा विच खड़ावा,

मन न मोहंदा रूप तेरा दिल करदा देखि जावा,

ऐसी पाई खींच तुम्बे नु दर ते आन खलोई,

तेरी मैं दीवानी होइ पौनहारियाँ तेरी मैं दीवानी होइ,

चोला तेरे नाम दा पाके मैं जोगन बन जावा,

उठदी बेहंदी जाग दी सोहन्दी तेरा नाम ध्यावा,

शिव जंडोली अरजा करदा राजन रोब्बी अरजा करदा दे चरना विच धोई,

तेरी मैं दीवानी होइ पौनहारियाँ तेरी मैं दीवानी होइ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।