साई मुझको तू अपना बना ले

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॥ पावन पाठ ॥

साई मुझको तू अपना बना ले नसीब मेरे जग जायेगे,

अपने चरणों में मुझको भुला ले,

नसीब मेरे जग जायेगे.......

साई है रेहमत का खजाना तुझको पुकारे सारा ज़माना,

अपने दामन में मुझको छुपा ले नसीब मेरे जग जायेगे,

बीच भवर में मेरी नैया तू ही मेरे साई की भईया,

मेरी दुभा से कश्ती बचा ले नसीब मेरे जग जायेगे,

तुम पे जाऊ मैं बलिहारी तुमने किस्मत सब की सवारी,

मेरे साई तू मुझको निभा दे नसीब मेरे जग जायेगे,

तेरे दर से मेरा गुजारा मुझको मिला अब तेरा सहारा,

कौन तेरे सिवा अब संभाले नसीब मेरे जग जायेगे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।