मैनु देओ दर्शन बाबा लाल नाव मेरी गोते खंदी है

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॥ पावन पाठ ॥

मैनु देओ दर्शन बाबा लाल नाव मेरी गोते खंदी है,

नाव मेरी गोते खांदी है दुनिया लंग लंग जन्दी हैम

मैनु लाओ चरना दे नाल के ज़िंद मेरी बड़ा सताउंदी है,

मैनु देओ दर्शन बाबा लाल नाव मेरी गोते खंदी है,

तेरी टिकट जिह्ना दे पले ओह स्वर्ग पूरी न चले,

आसि रह गये पापी क्ले जिहां ने टिकट गवाई है,

मैनु देओ दर्शन बाबा लाल नाव मेरी गोते खंदी है,

मैनु लाओ चरना दे नाल न एथे बहन न भाई है,

मैनु देओ दर्शन बाबा लाल नाव मेरी गोते खंदी है,

मैं अरजा करदी दाता तू पिता है तू ही माता,

मेरी विनती करो स्वीकार मैं किती दर ते दुहाई है,

मैनु देओ दर्शन बाबा लाल नाव मेरी गोते खंदी है,

एह ब्रह्मा विष्णु सारे एह ज्योति दे चमकारे ज्योत नल ज्योत समाई है,

मैनु देओ दर्शन बाबा लाल नाव मेरी गोते खंदी है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।