छड़ पाप जुलम दियां आदता जिह्ना दी जग निंदिया करे

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॥ पावन पाठ ॥

नेकी खट ले जहां विच बंदेया तेरा यश दुनिया करे,

छड़ पाप जुलम दियां आदता जिह्ना दी जग निंदिया करे,

होया अमृत वेला उठ नाम थया ले,

ज़िन्द्जान अपनी तू सफल बना ले,

ले ले नाम तू गुरा दा प्रभु सिमरन कर तेरे नाल जो चले,

छड़ पाप जुलम दियां आदता जिह्ना दी जग निंदिया करे,

एह चार दिना दा जीवन तेरा सदा नि होना रेन बसेरा,

तू ता छड़ जाना जग सदा याद रख रब जो तेरे नाल चले,

छड़ पाप जुलम दियां आदता जिह्ना दी जग निंदिया करे,

धिया पुत्रा ने तेरे काम नहीं आना,

खाली हथ आया तू ते खाली हाथ जाना,

होया पिंजरा पुराण किसे संग नहीं जाना बंदे नाल तेरा,

छड़ पाप जुलम दियां आदता जिह्ना दी जग निंदिया करे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।