राम लखन दोनों बाल नी

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

राम लखन दोनों बाल नी सीता नाल नी तीनो तुर चले वन नु,

पानी विच अखियां डूभ गइयाँ जी आग लग गई मन नु,

राम लखन दोनों बाल नी सीता नाल नी तीनो तुर चले वन नु,

माता ककई ने जुलम कमाया कौशलया माँ दे कलेजे हथ पाया,

माये नी मैं मर मर जावा पुत्र जिह्ना ने बिशड जांदे ओ किवा जिंदियाँ ने मावा,

राम लखन दोनों बाल नी सीता नाल नी तीनो तुर चले वन नु,

पुत्र प्यारे मेरी अखियां दे तारे,

दूर कौन ले गया दिला दे सहारे,

माये नी मैं मर मर जावा पुत्र जिह्ना ने बिशड जांदे ओ किवा जिंदियाँ ने मावा,

राम लखन दोनों बाल नी सीता नाल नी तीनो तुर चले वन नु,

सुना सुना होया आज अयोध्या दा राज मैं ते आज भूल गई सारे कम काज,

माये नी मैं मर मर जावा पुत्र जिह्ना दे विश्ड जांदे किवे जिंदियाँ माँ,

राम लखन दोनों बाल नी सीता नाल नी तीनो तुर चले वन नु,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।