बिना प्रभु तो किसे दे नाल प्यार न करि

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॥ पावन पाठ ॥

बिना प्रभु तो किसे दे नाल प्यार न करि मना याद रखी,

सोना छड़ के तू मिटटी दा व्यपार न करि ओ मना याद रखी,

बिना प्रभु तो किसे दे नाल प्यार न करि मना याद रखी,

झूठ बोली न कदे कदे घट तोली न,

लेना किसे ने तेरे तो उधार बंदया मना याद रखी,

बिना प्रभु तो किसे दे नाल प्यार न करि मना याद रखी,

तेरे पापा नु किसे नहीं कजना,

तनु पल विच लोका ने भुलाना सजना ओ मना याद रखी,

बिना प्रभु तो किसे दे नाल प्यार न करि मना याद रखी,

नेकी खत ले तू छड़ झूठ बोलना,

नहीं ते यमा वाली पेनी तनु मार बंदिया ओ मना याद रखी,

बिना प्रभु तो किसे दे नाल प्यार न करि मना याद रखी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।