बाबा जी नू भूलियो न

पारंपरिक
महादेव भजन बाबा बालक नाथ भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बाबा जी नू भूलियो न होर किसे ते डुलियो न,

एहतवार नू सुचे मूहि बाबे दे रोट चढ़ा लो,

सिद्ध योगी नू भूलियो न होर किसे ते डुलियो न

हाथ जोड़ के विनती मेरी सारे भगता वीरा नू,

बाबा बालक जग दा मालिक बदल दिंदा तकदीरा नू,

नाम ओहदे दी ज्योत जगा के नित ही नाम ध्यावो,

बाबा जी नू भूलियो न होर किसे ते डुलियो न,

शिव शंकर तो ले वरदान ओह कलयुग दे विच आया सी,

त्रेता जी नू गुरु बना के बालक नाथ कहाया सी,

महालक्ष्मी दे लाडले दी तू सी जय जय कार भुलावों,

बाबा जी नू भूलियो न होर किसे ते डुलियो न,

रब ने आके चरिया गइयाँ माता रत्नो ल्हारी दियां,

विरला विरला कोई जांदा है रम्जा पौणाहारी दियां,

सिद्ध जोगी नू दिल च वसा के पल पल नाम ध्यावो,

बाबा जी नू भूलियो न होर किसे ते डुलियो न,

आदमपूरियां पवन है कहंदा नाथ मेरे नू जो मन लेंदा,

घाटा उसनु कदे ना पेंदा जोगी उसदे नाल है रेह्न्दा,

सोनी पटी वाले वंगु उसदियाँ भेटा गावो,

बाबा जी नू भूलियो न होर किसे ते डुलियो न,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।