तेरी मैं दीवानी होइ शेरीवालिये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरी मैं दीवानी होइ शेरीवालिये तेरी मैं दीवानी होइ,

पैरा दे विच पा के घुंगरू नाम दी ले ली लोई,

तेरी मैं दीवानी होइ शेरीवालिये तेरी मैं दीवानी होइ,

वांग ध्यानु विच जगराते नच नच धरत हिलोनी,

ताड़ी लाके भेटा गा के जय जय कार भुलानी,

तेरे वाजो होर किते न मिलनी दातिए तोई,

तेरी मैं दीवानी होइ शेरीवालिये तेरी मैं दीवानी होइ,

तेरे नाम दे रंग च दातिए तन मन सारा रंगया,

दर्शन तेरा करना दाताइये होर न कुज भी मंगिया,

गल विच पल्ला पाके दातिए तेरे दर ते आन खिलोई,

तेरी मैं दीवानी होइ शेरीवालिये तेरी मैं दीवानी होइ,

शिव झन्डोली वाले नु है तेरा इक सहारा,

राजन दी है दीद दातिए बन जा भगत प्यारा,

सिमरन तेरा करके दातिए जाग पई किस्मत मेरी सोइ,

तेरी मैं दीवानी होइ शेरीवालिये तेरी मैं दीवानी होइ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।