साईं हुज़ुर दर पे फर्याद लेके आया

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॥ पावन पाठ ॥

साईं हुज़ुर दर पे फर्याद लेके आया,

मुझको नवाजो बाबा उम्मीद लेके आया,

तेरी दीवानगी में जग है बड़ा दीवाना,

अपनी मुरादे लेके आता यहाँ जमाना,

है शान साई ऊंची दुनिया पे ऐसे छाया,

साईं हुज़ुर दर पे फर्याद लेके आया

घर मुझको दे साई अपने ही घर के आगे,

तेरी दीद सुबह जब नींद से हम जागे,

घर में सजा लू तुझको शिरडी के साई बाबा,

साईं हुज़ुर दर पे फर्याद लेके आया

अपने कर्म का जलवा हम पर भी साई करदो,

झोली मैं खाली लाया अपनी दुआ से भरदो,

शिरडी के वाली सुनलो यही आस लेके आया,

साईं हुज़ुर दर पे फर्याद लेके आया

साई का ऐसा गुलशन महके फ़िज़ा भी,

खुसबू की ऐसी रंगत हस्ता है गुलिस्तां भी नूरानी भोली सूरत ऐसे है साई बाबा ,

साईं हुज़ुर दर पे फर्याद लेके आया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।