दुःख चिंता संकट काटे भक्त का भारी रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मोरछड़ी की महिमा देखो सब से न्यारी रे,

दुःख चिंता संकट काटे भक्त का भारी रे,

युगो युगो से श्याम धनि के संग में ये तो रहती है,

श्याम धनि की किरपा तो इस के जरहिये ही बहती है,

मुर्दे में भी प्राण फुक्दे ये बड़ी बलकारी रे,

दुःख चिंता संकट काटे भक्त का भारी रे,

श्याम बहादुर के हिट मंदिर पट इस ने खोल दिये,

बड़े बड़े तालो को इसने झट माटी में रोल दिये,

गूंजे फिर जैकारे नाम के आये श्याम बिहारी रे,

दुःख चिंता संकट काटे भक्त का भारी रे,

आलू सिंह जी के खाता में यह लहराई थी बहुत घनी,

लाखो भक्तो के विपदा में थी जिनके भी आशीष धरी,

चमत्कार में नमस्कार है जाने दुनिया सारी रे,

दुःख चिंता संकट काटे भक्त का भारी रे,

श्याम धनी को प्यारी भगता हिट कारी मोर छड़ी,

विपला की विनती है माहरे सागे रहियो सदा खड़ी,

वरणी ना जावे महिमा थी जाऊ बलिहारी रे,

दुःख चिंता संकट काटे भक्त का भारी रे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।