हे वीर तुमहरा क्या मैं तारीफ कर सकता हु

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॥ पावन पाठ ॥

हे वीर तुमहरा क्या मैं तारीफ कर सकता हु,

तुझमे वो शक्ति है जो तूफ़ान खड़ा कर सकते,

हे वीर तुमहरा क्या मैं तारीफ कर सकता हु,

हे वीर तुम्हरी क्या मैं तारीफ कर सकती हु,

तुझमे वो शक्ति है जो तूफ़ान खड़ा कर सकते,

हे वीर तुम्हरी क्या मैं तारीफ कर सकती हु,

तुमने ही तो भारत को हर मोड़ पे बचाया,

फांसी की सूली पे चढ़ गया फिर भी गम न आया,

अब न पीछे हटना तू तूफ़ान खड़ा कर सकते,

हे वीर तुमहरा क्या मैं तारीफ कर सकता हु,

तूने ही तो शांति का सन्देश बताया,

आपस में न लड़ने की को बात बताया,

शांति से बस मन ना माने तलवार उठा सकते,

हे वीर तुम्हरी क्या मैं तारीफ कर सकती हु,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।