इक लाल देदे दातिया

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॥ पावन पाठ ॥

इक लाल देदे दातिया मैनु लाल देदे लाला वालेया,

फूल भुटा तेरे दर ते चढ़ावा,

इक लाल देदे दातिया मैनु लाल देदे लाला वालेया,

ढोल वाजेया नाल माथा पूत दा टिकावे गये,

न्याज बना के तेरे दर ते चड़वागे,

तेरे नाम दे चिराग मैं जगावा,

इक लाल देदे दातिया मैनु लाल देदे लाला वालेया,

तेरा दर छड़ पीरा किते नहीं जाना है,

तेरे तो ही मंगना है तेरा दिता खाना है,

ठंडा चादर में लेके दर ते आवा,

इक लाल देदे दातिया मैनु लाल देदे लाला वालेया,

पीरा दिया पीरा निगा महरा वाली मार दे,

दानी जटी वांगु साहनु भी तार दे,

सोनी पटी वाले वांगु गुण गावा,

इक लाल देदे दातिया मैनु लाल देदे लाला वालेया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।