इक जोगी वे तेरा चिमटा निराला

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॥ पावन पाठ ॥

इक जोगी वे तेरा चिमटा निराला,

जद तू आप भजावे,

सबना दी गल बन जन्दी है रेहमत जद बरसावे,

इक जोगी वे तेरा चिमटा निराला,

इस चिमटे दी शक्ति नु जद गोरख परखन आये,

मार के चिमटा बदला विच बिजली चमकन लाये,

सबना दी गल बन जांदी है रेहमत जद बरसाए,

इक जोगी वे तेरा चिमटा निराला,

इस चिमटे दी शक्ति नु माँ रत्नो परखन आई,

मार के चिमटा धरती दे विच लसियां दी लहर बगावे,

सबना दी गल बन जांदी है रेहमत जद बरसाए,

इक जोगी वे तेरा चिमटा निराला,

चिमटा सिर ते रख के जोगी सब नु तारी जावे,

सावन ते जोगी कर्म कमा दे सिमी तेरे गुण गावे,

सबना दी गल बन जांदी है रेहमत जद बरसाए,

इक जोगी वे तेरा चिमटा निराला,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।