जी करदा देखि जावा जोगियां तेरी सूरत प्यारी नु

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

दिल विच उतार लवा भव सागर अवतारी नु,

जी करदा देखि जावा जोगियां तेरी सूरत प्यारी नु.

हेठ गरु ने डेरा लाया माँ रत्नो दा लाल कहाया,

चिमटे वाला तू सद वाया सजदा मोर सवारी नु,

जी करदा देखि जावा जोगियां तेरी सूरत प्यारी नु.

करके वेख महोबत सच्ची वेख चाली दे हुन्दे आसि

जिह्ना आस जोगी ते रखी न जाने स्यारी वयारी नु,

जी करदा देखि जावा जोगियां तेरी सूरत प्यारी नु.

खुशिया दे नाल भर दा वेहड़ा पार करे तू सब दा वेहड़ा,

नरिंदर भी आ मंगता तेरा सीने ला भिखारी नु,

जी करदा देखि जावा जोगियां तेरी सूरत प्यारी नु.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।