आजा वे आजा पौनहारियाँ

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॥ पावन पाठ ॥

आजा वे आजा पौनहारियाँ,

आजा वे आजा दुधाधारियां वे किथे लाये ने डेरे,

नैन प्यासे तेरी दीद दे कदो पावे गा फेरे,

जय जय पौणाहारी दी जय,

जय जय दूधाधारी दी जय,

आजा वे आजा गौआँ वालेया वे पाहुआवलिया वे किथे मलिया ने थावा,

ज्यादा विच मन लोचदा वे कीह्नु दुखड़े सुनावा

आजा वे आजा गौआँ वालेया

आजा वे चिमटे वालेया वे धुनें वालेया लाइयाँ तोड़ निभाभी,

तेरे बिना कोई होर न वे मैंनू गल नाल लावी,

जय जय चिमटे वाले दी जय जय जय धुनें वाले दी जय,

आजा वे आजा सिंगी वालेया वे झोली वालेया वे कदो होने ने मेले,

रीजा हो जान पूरियां मूक जान झमेले,

आजा वे आजा सिंगी वालेया आजा वे आजा झोली वालेया,

आजा वे आजा जटा वालेया वे जटा धारियां कर पार उतारे,

करदे सरोये ते भी रेहमता वे बेड़ी लग जो किनारे,

जय जय जटा वाले दी जय जय जय जटा धरी दी जय

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।