आप के दर पे जो आ गया

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

आप के दर पे जो आ गया,

सब मुरादे वही पा गया,

आप के दर पे जो आ गया,

सारी रचना को तू ही रचे,

इस लिए तेरे दर आ गया,

गुरु जी के जो दर आ गया,

आप के दर पे जो आ गया,

मेरी नजरो में तेरा ही खुमार,

आज सजदा अदा हो गया,

गुरु जी के जो दर आ गया,

आप के दर पे जो आ गया,

मांग ने की जरूरत नहीं,

देता है उसको जो पा गया,

गुरु जी के जो दर आ गया,

आप के दर पे जो आ गया,

सारी दुनिया उसे मिल गई,

तेरे चरणों में जो आ गया,

आप के दर पे जो आ गया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।