मैं जोगन साई फ़कीर दी आ

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मैं जोगन साई फ़कीर दी आ,

मैनु दुनिया दी कोई फिकर नहीं,

मैं कमली साई फ़कीर दी आ,

एह दुनिया जे पई केहन्दी रहे,

मैंनू दुनिया दी कोई फिकर नहीं,

मैं कमली साई फ़कीर दी हां,

मैंनू दुनिया दी कोई फिकर नहीं,

मैं जोगन साई फ़कीर दी आ

कोई तोड़ निभावन आया न,

कोई रिश्ता दिल न भाया न,

मैं सब नु पिशे छड़ आई,

मैं मंगति साई फ़कीर दी आ,

मैं जोगन साई फ़कीर दी आ

एह नाम खुमारी ऐसी है जो मंगन नल न मिलदी है,

एह निम्रत ऐसा सुचा है मैं भर भर लौटा पी आई,

मैं जोगन साई फ़कीर दी आ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।