सिद्ध योगी नाल प्यार पा लिया

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॥ पावन पाठ ॥

सिद्ध योगी नाल प्यार पा लिया सारी दुनिया न दसदा फिरा,

चोला भगमा रंगा के कनि मुंद्रा मैं पाके सब भगता च नचदा फिरा,

सिद्ध योगी नाल प्यार पा लिया सारी दुनिया न दसदा फिरा

मैं ता जग वाले सारे कम छड़ जी जाके लभ्या पहाड़ा विच रब जी,

जीहदे सिर ते जटावा पैरा विच खड़ावा मोरा वाले नु मै सजदा करा ,

सिद्ध योगी नाल प्यार पा लिया सारी दुनिया न दसदा फिरा

बन के तपस्वी मैं तप करा ओहदा ओहदे प्यार च तापाइया मैं धुनिया,

धुनें वाले नाथ जी दी नाम दी मैनु होर मस्तियाँ चढ़ गइयाँ दुनिआ,

चढ़ी नाम वाली लोर मेरी जोगी हाथ डोर दिन रात पूजा उसदी करा,

सिद्ध योगी नाल प्यार पा लिया सारी दुनिया न दसदा फिरा

शिव शम्भू जेहा योगी भंडारी है,

मेरा मन ताहि उसदा पुजारी है,

मेरा योगी है निराला,जपा ओहदे नाम दी माला मुहो वाणी ओह्दी पड़ दा फिरा,

सिद्ध योगी नाल प्यार पा लिया सारी दुनिया न दसदा फिरा

भेटा वालिये भगत ने जो गाइया ने सिद्ध नाथ दियां वदाईयाँ ने,

होया कोमल दीवाना सारा छड़ के ज़माना ओहदे चरना च वसदा फिरा,

सिद्ध योगी नाल प्यार पा लिया सारी दुनिया न दसदा फिरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।