मैंने झोली फैला दी कन्हैया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैंने झोली फैला दी कन्हैया,

अब खजाना तू प्यार का लुटा दे,

आया बन के मैं प्रेम पुजारी,

आया बन के मैं दर का भिखारी,

देदे झोली में इतना दयालु

मांग ने की ये आदत छुड़ा दे,

मैंने झोली फैला दी कन्हैया

मुझको इतनी शर्म आ रही है न जुबा से कही जा रही है,

तूने लाखो की बिगड़ी बनाई आज मेरी भी बिगड़ी बना दे,

मैंने झोली फैला दी कन्हैया

ऐसे कब तक चले गा गुजारा थाम ले आके दामन हमारा,

हो सके तो दया कर दयालु अपने चरणों की सेवा में लगा ले

मैंने झोली फैला दी कन्हैया

आज वनवारी दिल रो रहा है जो कभी न हुआ हो रहा है,

इक तमना है मरने से पहले अपना दर्शन मुझे भी करा दे,

मैंने झोली फैला दी कन्हैया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।