दुनिया के द्वारो से मैं ठोकर खा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

दुनिया के द्वारो से मैं ठोकर खा के श्याम धनि आई हु तेरे द्वार,

मेरी सुनी हो गई मांग सो गया बगियाँ का माली,

छोड़ चले भरताल,

दुनिया के द्वारो से मैं ठोकर खा के श्याम धनि आई हु तेरे द्वार,

तारा सा टुटा है हुआ रोग न कोई,

चली आई दर तेरे संजोग है कोई,

क्या बिगड़ा ऐसा कर्म मेरी क्यों किस्मत फूटी,

रूठ गये करतार,

दुनिया के द्वारो से मैं ठोकर खा के श्याम धनि आई हु तेरे द्वार,

बनता है कुछ भी न सिवा एक रोने से,

खुशियों से झूमि थी बिन देख गोने के,

कितने ही लुटा सुहाग न छूटी हाथो के मेहँदी रह गई मैं मजधार,

दुनिया के द्वारो से मैं ठोकर खा के श्याम धनि आई हु तेरे द्वार,

कहते है तुम सब की बिगड़ी बनाते हो,

दुखियो के दातारि दुखड़े मिटाते हो,

करे आज विनती ये अभागी झोली फैला के,

भीख दया की डाल,

दुनिया के द्वारो से मैं ठोकर खा के श्याम धनि आई हु तेरे द्वार,

विनती सुनी जो न तन मैं भी त्यागु गी,

तेरी चौकठ पे घनश्याम खुद को मिटा दूंगी,

अब हाथो में तेरे डुबोदे या कर दे तू पार,

वर्मा लुटा संसार,

दुनिया के द्वारो से मैं ठोकर खा के श्याम धनि आई हु तेरे द्वार,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।