नाम जपनं दी आदत पा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नाम जपनं दी आदत पा, नाम जपनं दी आदत पा,

ध्यानु भगत दी भगती वरगा मेनू भी कोई पाठ पड़ा,

नाम जपनं दी आदत पा....

तेरे नाम दी महिमा दा मैं घर घर विच प्रचार करा,

एहनी हिमत देदे मेनू बन के सेवादार करा,

भगता दे विच प्यार बडावा दिल अपने नु कहना हा,

नाम जपनं दी आदत पा.....

किसे न मैं वैर करा न एसी सोच बना दे माँ,

निरंकार संतोष देदे सब दे काम करा दे माँ,

तेरे चरना विच रह के जीवन सारा अर्पण करा,

नाम जपनं दी आदत पा

कण कण विच हर दम मैं ते रूप तेरा ही देखा माँ,

मेरे हाथ विच तेनु मिलन दी है कोई रेखा मैं,

नच के तेनु रोज दिखावा पाइयां तेरियां पींगा माँ,

नाम जपनं दी आदत पा

मैं तेरा है पल्ला फडया तू बाह फड ले मेरी,

तारेया दे विच बीत गई है मेरी उम्र बथेरी,

दरशी भी ते लाल तेरा है क्यों निमाना दूर बेठा,

नाम जपनं दी आदत पा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।