गुरु पूरब दियां सरेया नु हों वादाहियाँ जी

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॥ पावन पाठ ॥

होण मुबारक सब नु एह जो घड़ियाँ आइयाँ जी,

गुरु पूरब दियां सरेया नु हों वादाहियाँ जी,

जग नु तारन वाला जग ते आप आया,

वाणी रूप च करने सब नु जाप लाया,

सुकिया कलियाँ देखियाँ मैं मैं फिर महकाइयां जी,

गुरु पूरब दियां सरेया नु हों वादाहियाँ जी,

ओहना लिखा मत जिह्नी है कहले नु,

पार उतारी दाता दिल दे मैले नु,

भला हॉवे सरबत दा एहो आसा लाइयाँ जी,

गुरु पूरब दियां सरेया नु हों वादाहियाँ जी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।