सूखा नाल आई शिवरात्रि महादेव तो दुआवा मंग दे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

संगता ने भंगड़े पौन्दियाँ पीनदे ने प्याले भंग दे,

सूखा नाल आई शिवरात्रि महादेव तो दुआवा मंग दे,

गल विच माला सोहना लगदा वषुक तेरे हाथ विच त्रिशूल सजदा,

भंग दा धतूरा जदो पीवे भोला नाथ डम डम डमरू बज्दा,

बम बम भोला बोल दे भगत रंगे होये तेरे विच रंगदे

सूखा नाल आई शिवरात्रि महादेव तो दुआवा मंग दे,

लाके चरनामत भोले तेरी भंग दा संगता ने खुशियां मनांदियाँ,

धरती दे उते किते लग दा न पैर जदो नच नच धरती हिलोदिया,

बोलदे जय कारे तेरे भगत प्यारे भंग रच गई विच अंग अंग दे,

सूखा नाल आई शिवरात्रि महादेव तो दुआवा मंग दे,

जगह जगह मंदिरा ते चलदे भंडारे बाबा खुशिया तू सारिया न वंद दा,

देवो के महदेव करू तेरी सेवा मालिक तू सरे भ्रमांड का,

कोई भोले नाथ कोई आखे भूत नाथ दर बह के मस्त मलंग दे,

सूखा नाल आई शिवरात्रि महादेव तो दुआवा मंग दे,

उतरे न भंग जह्नु चढ़ जांदा रंग जदो नाम वाली चढ़ झंडी खुमारी है,

हो के असमंग भोले नाथ दा दीवाना इस बचे उते किरपा तुम्हारी है,

लिख्दा रवेश्वर पिंड दहेड़ा पाँव नच्दे कदे नहीं थक दे जदो पींदे ने प्याले भंग दे

सूखा नाल आई शिवरात्रि महादेव तो दुआवा मंग दे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।