हे त्रिलोकी उद्धार कर

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

छोड़ के आया मैं जग तेरे दवार पर,

अपनी किरपा से त्रिलोकी उधार कर,

उधार कर तू बेडा पार कर तू चमत्कार कर तू बेडा पार कर तू,

छोड़ के आया मैं जग तेरे दवार पर,

तू ही आदि तू ही अनंता तू ही जग का सार है,

हॉवे मनोहर पुराण यहाँ पर वो तेरा ही द्वार है,

शरणागत की लाज रखी है,

भक्त का मान रखा है,

खाली हाथ न लौटा दवार से चमत्कार ये किया है,

मैं भी अभागा आया तेरे द्वार पर अपनी किरपा से त्रिलोकी उधार कर,

उधार कर तू बेडा पार कर तू चमत्कार कर तू बेडा पार कर तू,

छोड़ के आया मैं जग तेरे दवार पर,

दीं हीं का तू रखवाला शिव शंकर मत वाला,

करता भला तू सब का जग में ऐसा भोला भाला,

तेरी दया से तेरी किरपा से सब कुछ सुलभ हुआ,

सुन ले अर्ज हमारी भोले बंदे जीवन सफल बना,.

बिगड़े काज बना तू चमत्कार कर अपनी किरपा से त्रिलोकी उधार कर,

उधार कर तू बेडा पार कर तू चमत्कार कर तू बेडा पार कर तू,

छोड़ के आया मैं जग तेरे दवार पर,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।