तू तो आँखों से इक पल न ओजल हुआ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तू तो आँखों से इक पल न ओजल हुआ,

तू मेरा हो गया देखते देखते,

देखते ही तेरी प्यारी चितवन प्रभु,

दिल फ़िदा हो गया देखते देखते,

तू तो आँखों से इक पल न ओजल हुआ,

तू मेरा हो गया देखते देखते,

ज़िंदगी में बहुत मुश्किलें थी मगर,

मिट गई हर गीला देखते देखते,

हुए रोशन मेरे रात दिन और सभी,

ऐसा दीपक जला देखते देखते,

तू तो आँखों से इक पल न ओजल हुआ,

तू मेरा हो गया देखते देखते,

सोचता हु के तेरे किरपा से प्रभु क्या से क्या हो गये देखते देखते,

जो फकीरी में दिन काट ते थे कभी बादशाह हो गये देखते देखते,

तू तो आँखों से इक पल न ओजल हुआ,

तेरी सोहनी सी सूरत जो देखि प्रभु,

दिल का गुलशन खिला देखते देखते,

सोचता हु मैं शुकराना कैसे करू,

ऐसा दिलबर मिला देखते देखते,

तू तो आँखों से इक पल न ओजल हुआ,

तुमसे मिलने मिलाने का दिल जो करे बन गया सिलसिला बन गया देखते देखते,

खाटू में श्याम भक्तो का चोखानी को मिल गया काफिला देखते देखते,

तू तो आँखों से इक पल न ओजल हुआ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।