हे शम्भू शीश गंगधारी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हे शम्भू शीश गंगधारी तू बड़ा किरपावान,

तू ही संकट हारी तुझे कहे त्रिपुरारी करे जग कल्याण,

हे शम्भू शीश गंगधारी तू बड़ा किरपावान,

विश का तूने जग पान किया है,

नीलकंठ तेरा नाम हुआ है,

विश भोग तू हरता है सब के ओह गुण हारी तेरा नाम हुआ है,.

ओ शम्भू त्रिशूलधारी तू है देव महान,

तुझे कहे जटा धारी करे दुखो का निदान,

हे शम्भू...........

जिस ने भी तेरा ध्यान किया है बाबा बर्फानी तूने सब कुछ दिया है,

कालका भेह हुआ दूर उसका महाकाल का जिस ने जाप किया है,

हे नटराजा हे चन्दरधारी ॐ कारेस्वर किरपा न्यारी,

त्रिशूल धारी डमरूधारी हे भूतो के नाथ प्रयणकरि,

हे शम्भू त्रि नेत्र धारी रखले भक्तो का मान,

तू है अभयंकारी करदे अभय प्रधान,

हे शम्भू...........

हम तो आस लिए तेरी आये है,

भाव भक्ति का कोई लाये है,

हे शम्भू तू है पाप हारी कर हारा उधार,

तू है कामहारी हारले क्रोध और काम,

हे शम्भू...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।