बांके बिहारी रे दूर करो दुःख मेरा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बांके बिहारी रे दूर करो दुःख मेरा,

गिरवरधारी रे दूर करो दुःख मेरा,

सुना है जो तेरी शरण में आवे,

उसके दुखड़े सब मिट जावे,

मैं आई शरण तिहारी रे,

बांके बिहारी रे दूर करो दुःख मेरा,

सारी दुनिया की ठुकराई अब तो तेरी शरण में आई,

मेरी लाज रखो वनवारी रे,

बांके बिहारी रे दूर करो दुःख मेरा,

मीरा अहिलियाँ गणिका नारी,

सब ही तुमने पार उतारी,

अब आगी मेरी वारि रे प्यारे,

बांके बिहारी रे दूर करो दुःख मेरा,

मोर मुकट पीताम्भर धारी,

संग में है श्री राधा प्यारी,

इन दोनों की बलहारी रे,

बांके बिहारी रे दूर करो दुःख मेरा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।