आज जोगी ने आउना है

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॥ पावन पाठ ॥

राती सुनपे दे विच आया मैनु जोगी दर्श दिखाया,

मेरा रोम रोम मुस्काया आज मैं घर न सजाऊना है,

बहनों दूध न जाग ना लायो आज जोगी ने आउना है,

साइयो ने मेरे इस घर विच फिर रौनक लग जावेगी,

रबी ज्योत न मेरे घर विच फिर ज्योति जग जावे गी,

मैनु पौन पुरे दी आ गी मैं ता विच उडीका बेहगी ,

लेके पाली न बाहा विच लाड लडोना है,

बहनों दूध न जाग ना लायो आज जोगी ने आउना है,

भांत भांत दे भोजन मैं जोगी लई आज बनाये नि,

पाली दी राहा दे विच मैं सदरी फूल विशाये नि,

हीरे बाल मुखा विच रखा मैं जोगी दी रहावा तका,

तक्दी दा घर भूल न जावे एह बाल नयाना है,

बहनों दूध न जाग ना लायो आज जोगी ने आउना है,

मेरी कोमल अखियां नू तांगा है पौनहार दियां,

गला करदी रेहँदी है मैं जोगी दूधधार दियां,

ओहदे दिल दियां फड़ तू तारा ओह रत्नो दिया लाउगा सारा,

दुनिया दे मालक दे हूँ मैं चरनी लग जाना है,

बहनों दूध न जाग ना लायो आज पाली ने आउना है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।