मँग लो मुरादां अज माँ तो मुहों मंगियाँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मँग लो मुरादां अज माँ तो मुहों मंगियाँ,

जागे वाली आई सोहनी रातमँग लो मुरादां अज माँ तो मुहों मंगियाँ

आई वंद दी माँ खुशियां दी दात,

मँग लो मुरादां अज माँ तो मुहों मंगियाँ,

करलो दीदार माँ सारे रज रज के मैया दे जय कारे बोलो सरे ग़ज वज के,

लेलो सूखा वाली मैया तो सौगात,

मँग लो मुरादां अज माँ तो मुहों मंगियाँ,

आई जागे वाली आज सोहनी रात......

नाम वाली गंगा विच गोते सारे मार लो,

मन दिया मैला आज सरियाँ उतार लो,

माँ दी रेहमता दी होइ बरसात ,

भागा वाली आज दी घडी,

आई जागे वाली आज सोहनी रात......

हुंडी मजबूर पूरी जिह्ना दी बनादी है,

ओहना दे ही घर विच जग दी ज्योति है,

बड़ी मेहरबान होइ ओह्दी मांग,

भागा वाली आज दी घडी,

आई जागे वाली आज सोहनी रात......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।