असि उड़ दे आसरे तेरे

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॥ पावन पाठ ॥

असि उड़ दे आसरे तेरे,

गुफा दे विच रेहन वालेया,

लागियां रोनका साढ़े वेहड़े,

असि उड़ दे आसरे तेरे,

योगी शाहतलाइया वालेया,

कोठियां भी द्वितीया तू कारा भी द्वितीया ,

झूठ न मैं बोला गलना करदा है सचियाँ,

लाईये बाहरले देशा दे विच गेडे,

गुफा दे विच रेहन वालेया...

तेरी किरपा दे नाल काम साढ़े चलदे,

बनगे करोडा पति जेहड़े तनु मंदे,

हाथ रखी सदा सिर उते मरे,

गुफा दे विच रेहन वालेया,....

हर साल जोगी तेरा लंगर लगाउने आ,

रोट प्रशाद लेके गुफा उते आउने आ,

सोनी कहंदा करि सूखा दे सवेरे,

गुफा दे विच रेहन वालेया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।