साई नाम का जग है दीवाना

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॥ पावन पाठ ॥

साई नाम का जग है दीवाना,

करता सब की मुरादे है पूरी,

इसकी रहमत का देखा नजारा,

आस रहती न कोई अधूरी,

साई नाम का जग है दीवाना,

सेवा करले तू सची लगन से,

दूर हो जायेगे दुःख ये सारे,

दर बदर जो भटकता है बंदे,

बोल क्या है तेरी मज़बूरी,

साई नाम का जग है दीवाना...

अल्लहा मालिक कलम से लिखाया,

उसके दर से ये संदेसा आया,

दम बदम हु उसकी का दीवाना,

जिसके मन में है श्रदा सबुरी,

साई नाम का जग है दीवाना,

साईं का अर्थ है गम घटाना,

क्यों न बंदे तू साईं को जाना,

वो तो रहता है अंग संग सबके,

जैसे हीरन के संग कस्तूरी,

साई नाम का जग है दीवाना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।